Wednesday, 21 February 2018

मेरा सुकून

                              मेरा सुकून



नदी में डूब कर बुझ गया सूरज
चाँद बर्फ की चादर ओढ़ आया है ,
         
          ज़िद्दी बच्चे सी हठ कर बैठी है नींद
            रात ने फिर तेरी यादों को बुलाया है,

मेरे खयालो ने मुझसे दिल-लगी की है
तेर एहसास की खुशबू से सारा घर महकाया है

           उम्मीद शाम ही से चौखट पर बैठी है
           मेरे हिस्से आज भी महज़ इंतज़ार आया है,

खफा न होना कि तेरी तस्वीर भिगो दी
कम्बख़्त आँखों से पानी छलक आया  है,

           कुछ कहने ना आओ , कुछ सुनने न आओ
            बस एक दफ़ा आओ कि ....

   मैंने तो सारा घर , सारा शहर देखा
  बता भी जाओ मेरे सुकून को कहा छुपाया है।



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