Thursday, 22 February 2018
Wednesday, 21 February 2018
मेरा सुकून
मेरा सुकून
नदी में डूब कर बुझ गया सूरज
चाँद बर्फ की चादर ओढ़ आया है ,
ज़िद्दी बच्चे सी हठ कर बैठी है नींदरात ने फिर तेरी यादों को बुलाया है,
मेरे खयालो ने मुझसे दिल-लगी की है
तेर एहसास की खुशबू से सारा घर महकाया है
उम्मीद शाम ही से चौखट पर बैठी है
मेरे हिस्से आज भी महज़ इंतज़ार आया है,
खफा न होना कि तेरी तस्वीर भिगो दी
कम्बख़्त आँखों से पानी छलक आया है,
कुछ कहने ना आओ , कुछ सुनने न आओ
बस एक दफ़ा आओ कि ....
मैंने तो सारा घर , सारा शहर देखा
बता भी जाओ मेरे सुकून को कहा छुपाया है।
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