Khwahishein- dil ki
I write what I feel.
Thursday, 22 February 2018
Wednesday, 21 February 2018
मेरा सुकून
मेरा सुकून
नदी में डूब कर बुझ गया सूरज
चाँद बर्फ की चादर ओढ़ आया है ,
ज़िद्दी बच्चे सी हठ कर बैठी है नींदरात ने फिर तेरी यादों को बुलाया है,
मेरे खयालो ने मुझसे दिल-लगी की है
तेर एहसास की खुशबू से सारा घर महकाया है
उम्मीद शाम ही से चौखट पर बैठी है
मेरे हिस्से आज भी महज़ इंतज़ार आया है,
खफा न होना कि तेरी तस्वीर भिगो दी
कम्बख़्त आँखों से पानी छलक आया है,
कुछ कहने ना आओ , कुछ सुनने न आओ
बस एक दफ़ा आओ कि ....
मैंने तो सारा घर , सारा शहर देखा
बता भी जाओ मेरे सुकून को कहा छुपाया है।
Sunday, 12 October 2014
अनदेखे कदम
दस्तक देकर वो गलियों में दौड़ जाते है ,
अनदेखे से कदम है किसी के ,
ज़ेहन में सुब्बह एक छोड़ जाते है।
कई बार कोशिश की उन्हें देख लूँ ,
छुप के बैठे है चौबारे पर ,
वो मगर लबादा ही ओढ़ आते है।
अनदेखे से कदम है किसी के ,
ज़ेहन में सुब्बह एक छोड़ जाते है।
कई बार कोशिश की उन्हें देख लूँ ,
छुप के बैठे है चौबारे पर ,
वो मगर लबादा ही ओढ़ आते है।
Friday, 10 October 2014
कसूर
अगर उन्हें सुकून मिलता है मुझे जलाने में , तो हमे जलना मंजूर है।
मगर उनसे कहो की फिर भी दिल अगर धड़कना ना छोड़े तो,
तो ए बेरहम इसमें मेरा फिर भी क्या कोई कसूर है । ।
मगर उनसे कहो की फिर भी दिल अगर धड़कना ना छोड़े तो,
तो ए बेरहम इसमें मेरा फिर भी क्या कोई कसूर है । ।
Subscribe to:
Posts (Atom)
